औराद और वजीफें

Khwaja Moinuddin Chishti History in HindiGarib Nawaz History in Hindi

औराद और वजीफें

हजरत ख्वाजा गरीब नवाज र0 अ0 के बख्शे हुए दुआ और वजीफे बहुत मक्बूल और बाअसर है।

जरूरतमन्द बराबर इनसे फायदा उठाते रहे और इन्शा अल्लाह आइन्दा भी उठाते रहेगे। नीचे आपकी कुछ दुआएं और वजीफे लिखे जाते है।

बीमारी से शिफा (स्वास्थ्य) के लिए

हजरत ख्वाजा गरीब नवाज 0 अ0 फरमाते है कि सूरः फातिहा सभी बीमारियों की दवा है। जब कोई बीमार किसी दवा से अच्छा न हो तो फज्र की नमाज में फर्ज और सुन्नत के बीच इकतालीस बार सूरः फातिहा सच्चे दिल से पढ़कर बीमार पर दम रकें, इन्शा अल्लाह बीमार स्वस्थ हो जाएगा। पढऋने का तरीका यह है कि बिस्मिल्लाह-हिर्रमापिर्रहीम के ‘मीम‘ को अलहम्दु के ‘लाम‘ से मिलाकर पढ़े।

कब्र वालों की जियारत के लिए ख्वाजा गरीब नवाज र0 अ0 ने इर्शाद फरमाया कि किसी कामिल बुजुर्ग से मुरीद होकर हर रोज बाद नमाजे इशा सोने से पहले आयतुल कुर्सी और चारों ‘कुल‘पढ़ कर सीने पर दम करें। इसके बाद दस बार सूरः फातिहा और अस्मा-ए-बारी तआला (खुदा तआला के निन्नानवे नाम) पढ़े फिर अस्मा-ए- मुबारक रसूले करीम स0अ0स0 पढ़कर दाएं-बाएं पहलू पर दम करें। इसके बाद दरूद शरीफ सौ बार पढ़े और सर की तरफ दम करें। इसके बाद सूरःअ-लम नशरह पढ़ता हुआ सो जाये इन्शाअल्लाह जिस बुजुर्ग का ख्याल दिल में करके सायेगा उनकी जियारत होगी। इक्तालीस दिन के बाद जिस कब्र के पास वावुजू दो जानू बैठ कर ध्यान करेगा, खुदा के हुक्म से साहिबे कब्र की जियारत होगी। उसका दिल साफ हो तो उससे बातचीत करने की तौफीक हो जाएगी। साहिबे कब्र से आन्तरिक फायदे भी हासिल कर सकता है।

रसूलुल्लाह स0अ0स0 की जियारत के लिए

हजरत ख्वाजा गरीब नवाज र0 अ0 ने फरमाया कि अगर किसी शख्स को रसूलुल्लाह स0अ0स0 की जियारत का शौक हो तो चाहिए कि जुमा की रात को दो रकअत नमाज नफ्ल अदा करें, इस तरह कि हर रक्अत में सूरः फातिहा के बाद आयतुल कुर्सी एक बार और सूरः इख्लास पन्द्रह बार पढ़े। नमाज पढ़ कर बहुत साफ दिल से पाक बिसतर पर चुपचाप सो जाए। खुदा के हुक्म से रसूलुल्लाह स0अ0स0 की जियारत होगी।

पेट में दर्द के लिए

हजरत ख्वाजा गरीब नवाज र0 अ0 ने फरमाया अगर किसी के पेट में सख्त दर्द हो तो सात बार सूरः अ-लम नशरह पढ़ कर पानी दम कर के पी ले या पिला दे तो दर्द बिल्कुल ठीक हो जाएगा।

लाइलाज बीमारी से निजात के लिए

हजरत ख्वाजा गरीब नवाज र0 अ0 ने फरमाया कि अगर किसी शख्स को लाइलाज बीमारी हो तो चाहिए किजुमा के दिन बाद नमाज अस्त्र से मग्रिब तक या अल्लाहु, या रहमानु या रहीमु‘ को पढ़ता रहे। इन्शाअल्लाह तआला इक्कीस दिन में तन्दुरूस्ती होगी, मगर रोजाना पढ़े, अगर मरजे मौत है, तो वह पढ न सकेगा।

जहरीले जानवर के काटने पर

जिस जगही पर जहरीले जानवर ने काटा हो उस जगह उंगली घुमाते हुए एक सांस में सात बार पढ़ कर दम करें-‘व इजा ब-तशतुम बशतुम जब्बारीन।‘

रोजी के लिए

नमाज के बाद कसरत (ज्यादा) से पढ़े-सुब्हानल्लजी सख-खर लना हाजा वमा कुन्ना लहू मुक्रिनीन।

बीमारी से छुटकारे के लिए

कोई बीमारी हो रकाबी पर लिखकर बीमार को पिला दे या तावीज लिखकर गले में डाल दे।
‘काफ-हा-या-ऐन स्वाद, हा-मीम-ऐन-सीन-काफ‘

दुश्मन को नीचा दिखाने के लिए

हजरत ख्वाजा गरीब नवाज र0 अ0 ने फरमाया कि अगर किसी के दुश्मन ज्यादा हों तो चाहिए कि वुजू करके सौ बार दरूद शरीफ पढ़े और हाथ उठाकर जनाबे बारी में दुआ करे। इसे बराबर पढ़ने से दुश्मन पस्त हो जाएगा ।

औलाद के लिए

हजरत ख्वाजा गरीब नवाज र0 अ0 ने फरमाया कि नमाज के बाद तीन बार कहे-‘ रबबना हब लना मिन अज्वाजिना व जुर्रीयातिना कर्र-त आयुनिंव वज-अलना लिलमुत्तकी-न इमामा।‘

आसेब (भूत-प्रेत) दूर करने के लिए

तीन बार पानी पर पढ़ कर मुंह पर छीटा मारे या कान में दम करें: ‘या अय्युहन्नासु तकूब्बकुम इन-न जल-ज लतिस्साअति शैउन अजीम ।‘

नमाज कुबूल होने के लिए

हजरत ख्वाजा गरीब नवाज र0 अ0 ने फरमाया कि बाद नमाज कलिमा तौहीद तीन बार पढ़कर यह दुआ पढ़ लेने से नमाज कुबूल हो जायेगी-

‘इन्नल्ला-ह युम्सकुस समावाति वल्अर्जि अन-तजुल-ल व ल-इन जालता इन अम-स- कहुमा मिन अह-दिम मिम-बाहिद इन्नहू का-न हलीमन गफूर।‘

आंखो की रोशनी के लिए

हजरत ख्वाजा गरीब नवाज र0 अ0 ने फरमाया है कि नमाज के बाद तीन बार पढ़ कर उंगली पर दम करके आंखो पर लगाने से बीनाई में कभी कमी न होगी, बल्कि जो कुछ पहले नुक्सान पहंुचा हो वह भी जाता रहेगा।

‘वस्समा-अ बनैनाहा बिऐदिंव व इन्ना लमूसिउन वल-अर-ज फ-रशनाहा फनिअमल माहिदून।‘

हर हाजत पूरी होने के लिए

इस आयत को अंगुश्तरी पर कुन्दा कराकर पास रखे: वईयका दुल्लजी-न कफरू लयुजलिकु-न-क बिअब्सारिहिम लम्मा समिउज्जि कर व यकूलूना इन्नहू ल-मजनून। वमा हु-व इल्ला जिकरूल लि िआलमीन।

अमल के नुक्सान से बचने के लिए

जो शख्स किसी काम के वक्त इस सूरः को पढ़ ले वह उस काम की दुश्वारियों से महफुज रहेगा। उसकी मुश्किल आसान हो जायेगी।
‘इजस्समाउन शक्कत। व अजिनतलिरब्बिहा व हुक्कत व इजल अर्जु मुद्दत व अलकत माफीहा व तखल्लत0‘

फलों की मिठास के लिए

यह आयत पढ़ कर खरबूजा या और कोई फल काटे तो इंशा अल्लाह तआला मीठा और जायकेदार मालूम होगा।

खोई हुई चीज को पाने के लिए

इस आयत को पढ़कर खोई हुई चीज तलाश की जाए तो इंशाअल्लाह जरूर मिल जायेगी वरना गैब से कोई अच्छी चीज मिलेगी-
‘व मिनन्नासि मैं यतखिजु मिन दुनिल्लाहि अनदादई युहिब्बूनहुम कहुब्बिल्लाहि। वल्लजी-न आमनू अशददु-हुब्बल लिलहि वलौ यरल्लजी-न ज-लमू इज यरौनल अजा-ब अन्नल कुव्वल लिल्लहि जमीऔं व अन्नल्ला-ह शहीदुल अजाब।‘

कर्ज अदा होने के लिए

सुबह व शाम सात बार पढ़ लेने से इंशाअल्लाह कर्ज अदा हो जायेगा-
‘रब्बि हबली मिल्लदुन-क जुर्रीयतन तय्यिबतन इन्न-क समी उद्दुआ।

रोजी रोजगार के लिए

महीने के शुरू के जुमा से चालीस जुमा तक ग्यारह बार रोजाना मग्रिब की नमाज के बाद पढ़े-
‘हसबुनल्लाह व निअमल वकील‘
और हर जुमे के बाद कागज पर निम्न आयत को लिखकर कुएं में डालता जाए इन्शाअल्लाह खुशहाल हो जाएगा।
‘व ल-कद मक्कन्नाकुम फिल अर्जि व ज-अलना लकुम फीहा मआइ-श कलीलम मा तशकुरून।‘

मुसीबत से छुटकारा पाने के लिए

इन आयत को पढ़ने से मुसीबत से छुटकारा मिल जाता है। ‘इन्न फी खलकिस्समावाति वलअरजि‘ से ‘लअल्लकुम तुफ- लिहून। तक (आले इमरान)

मुहब्बत के लिए

अस आयात को पढ कर शीरीनी पर दम करे, जिसको ख्लिाए इंशाअल्लाह मुहब्बत होगी।
‘व अलफैला बैन हुमुल अदाव-त वल बगजाअ इलर यौमिल कियामल।‘

हर मुहिम की कामयाबी के वास्ते

इय आयत को पढ़ कर दुआ करे इन्शाअल्लाह कामियाबी होगी। ‘व इजा जाअतहुम आयतुन कालू लन-नुअमि-न हता नुति-य मिस-ल मा ऊति-य रसूलुल्लाहि अअलहु हैसु यजअलु रिसालत।‘

रास्ते की बला दूर करने व बुखार-सर्दी मिटाने के लिए

इस आयत को पढ़ कर कश्ती या सवारी पर सवार होने से रास्ते की तमाम बलाओं से महफूज रहेगा। अगर किसी को सर्दी का बुखार आता हो तो बेर की लकड़ी पर लिखकर गले में डालने से इंशा-अल्लाह शिफ़ा होगी।

‘इन्नी तवक्कल्तु अलल्लाहि रब्बी ब-रबिब्कुम। मामिन दाब्बतिन इल्ला-हु-व आखिज़ुम बिना-सियतिहा।’

इल्म की तरक़्क़ी और जे़हन के लिए

हर रोज़ नमाजे़ सुबह के बाद पढ़ा करे।
‘मिनहा खलक्नाकुम व फिजा नुईदुकुम व मिनहा नुख्रिजुकुम तारतन उखरा0’

हर बीमारी व दर्द के लिए

बीमारी की जगह पर हाथ रखकर इस आयत को तीन बार पढ़ कर दम करे, इंशाअल्लाह तआला सेहत होगी।
‘कल्बुहुम बासितुन जिराऐहि बिलवसीद0’

मुसीबत से छुटकारा पाने के लिए

इस आयत से मुसीबत के वक्त पढ़े, इन्शाअल्लाह मुसीबत दूर हो जायेगी।
‘ला इला-ह इल्ला अन-त सुब्हान-क इन्नी कुन्तु मिनज्जलिमीन।’

बराए इस्तिखारा

हजरत ख्वाजा गरीब नवाज र0अ0 ने फरमाया कि दो नफ्ल पढ़ कर सूरः कौसर पन्द्रह बार और इस दुआ को 360 बार पढ़े फिर हाथ पर दम कर के सो जाये और हाथ सर के नीचे रखे-
‘या रशीदु अरशिदनी या अलीमु अल्लिम-नी मिनल हालिल कलामी।’

चेचक दूर करने के लिए

हजरत ख्वाजा गरीब नवाज र0अ0 फरमाते है कि चेचक के मौसम में या जब किसी के चेचक निकली हो तो सूरः रहमान का गन्डा बनाकर गले में डाले, इस तरह कि सूरः रहमान पढ़ना शुरू करे रहमान पढना शुरू करे और हर आयत ‘फबि अय्यि आलाई रब्बिकुमा तुकज्जिबान’ के बाद दम करके गांठ दे आखिर तक ऐसा ही करे। बहुत जल्द आराम होगा। यह उपाय आजमूदा है।

चेचक दूर करने के लिए

हजरत ख्वाजा गरीब नवाज र0अ0 फरमाते हैं कि चेचक के मौसम में या जब किसी के चचेक हो तो सूरः रहमान का गन्डा बनाकर गले में डाले, इस तहर कि सूः रहमान पढ़ना शुरू करे और हर आयत ‘फबि अय्यि आलाई रब्बिकुमा तुकज्जिबान’ के बाद दम करके गांठ दे आखिर तक ऐसा ही करे। बहुत जल्द आराम होगा। यह उपाय आजमूदा है।

लोगों को अपने हक मे करने के लिए

हजरत ख्वाजा गरीब नवाब र0अ0 ने फरमाया है कि अगर किसी को यह ख्वाहिश हो कि लोग मेरी इज्जत करें तो उसे चाहिए कि जब सुबह को सूरज एक नेजा ऊंचा हो जाए तो उस वक्त उसकी तरफ मुंह करके साफ दिल से सूरः रहमान पढ़ना शुरू करें ‘फबि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज्जिबान’ कहते वक्त सूरज की तरफ उंगली से इशारा करे। पहले चालीस बार पढ़ कर जकात अदा करनी चाहिये। तरीका इस्तेमाल यह है कि जब किसी के सामने जाना हो तो सूरः रहमान एक बार पढ़ कर जाए, अगर वक्त न हो, तो सिर्फ ‘फबि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज्जिबान’ को तीन बार पढ़ कर जाये।

दीवाने कुत्ते के काटने का इलाज

हजरत ख्वाजा गरीब नवाज र0अ0 फरमाते हैं कि अगर किसी को दीवाने कुत्ते ने काटा हो तो चाहिए कि इस आयत को रोटी के चालीस टुकड़ों पर लिखकर हर रोज एक टुकड़ा चालीस दिन तक खाये।

‘इन-नहुम यकीदू-न कैदंव व अकीदु कैदा। फ मह्हिलिल काफिरी-न अमहिलहुम रूवैदा’

लकवे के इलाज के लिए

हजरत ख्वाजा गरीब नवाज र0ह0 फरमाते हैं कि अगर किसी को लकवे की बीमारी हो जाये तो किसी कामिल बुजुर्ग से सूरः ‘जिलजाल’ को मय बिस्मिल्लाह शरीफ के लिखवाकर पाक बर्तन में धो कर पिया करे। बराबर इक्कीस दिन पीने से इन्शाअल्लाह आराम होगा।

कर्ज की अदायगी के लिए

हजरत ख्वाजा गरीब नवाज र0अ0 ने फरमाया- ‘कर्ज की अदायगी के लिए निम्न आयत को पांच बार हर नमाज में रोजाना इक्तालीस दिन तक पढ़े, इन्शाअल्लाह तआला कर्ज से बहुत जल्द निजात पाएगा।

‘बिस्मिल्लाहिर्रमानिर्रहीम’ कुलिल्लाहुम-म मालिकल मुल्कि तू तिल्मुल-क मन तशाउ से ‘बिगैरि हिसाब’ तक।

रोजगार पाने के लिए

हजरत ख्वाजा गरीब नवाज र0अ0 ने फरमाया- ‘अगर किसी को नौकरी न मिलती हो और रोजगार की कोई सूरत न हो तो उसको चाहिए कि महीने के पहले इतवार से सूरः यासीन शरीफ को इस तर्तीब से पढ़े कि सुबह की नमाज के बाद सूरज उगने से पहले दरूद शरीफ इक्तालीस बार फिर सूरः यासीन शरीफ ‘मुबीन’ दर ‘मुबीन’ पढ़े शब्द ‘मुबीन’ का सात बार तकरार करता रहे आखिर तक। पूरी सूरः के बाद एक बार फिर पढ़े, फिर दरूद शरीफ इकतालीस बार पढ़े और दुआ मांगे चालीस दिन तक इसी तरह पढ़े, पहले ही चिल्ले में कामियाब होगा वरना दूसरा चिल्ला करे अगर फिर भी कामियाब न हो तो तीसरा चिल्ला भी करे, कामियाब होगा और कोई सूरत रोजगार की हो जाएगी।

सकरात की हालत में

हरजत ख्वाजा गरीब नवाज र0अ0 ने फरमाया कि जिसको मौत की तकलीफ बहुत हो उसके पास बा-वुजू सूरः यासीन सच्चे दिल से पढ़े। इन्शाअल्लाह तआला सकराते मौत की सख्ती आसान हो जाएगी।

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