सरकार गरीब नवाज र0 अ0 का दहेली का सफर

Khwaja Moinuddin Chishti History in HindiGarib Nawaz History in Hindi

सरकार गरीब नवाज र0 अ0 का दहेली का सफर

एक बार हजरत खजा कतुबुद्दीन बख्तियार काकी र0 अ0 ने अजमेर शरीफ आने की इजाजत चाही। हजरत ख्वाजा गरीब नवाज र0 अ0 ने इसके लाब में लिखा कि-‘हर चाहने वाला अपने महीबूब के साथ होता है चाहे देखने में वह हजारों कोस दूर हो। इसलिए अच्छा यही है कि वही रहों, वहां तुम्हारी जरूरत है, कुछ दिन बाद हम खुद दहेली आयेंगे।

इस जवाव के कुछ दिन बाद सरकार गरीब नवाज र0 अ0 दहेली रवाना हुए। ख्वाजा कुतुबुददीन बख्तियार काकी र0 अ0 ने आपके आने की खबर सुलतान शम्सुद्दीन अलतमश को करना चाही, मगर हुजूर गरीब नवाज र0 अ0 ने मना फरमा दिया।

आपकी आमद की खबर देहली में कब छुपने वाली थी, आखिरकार देहली वालों को मालमू हो ही गया और सभी आलिम, सूफी और खुद सुल्तान शम्सुद्दीन अलतमश आपकी खिदमत में हाजिर हुए। इन दिनों बाबा फरीदुद्दीन गंज शंकर र0 अ0 इस कदर मेहनत से इबादत कर रहे थे कि जिस्म में चाून की बूंद भी बाकी न थी, इसी कमजोरी की वजह से हुजूर गरीब नवाज र0 अ0 की खिदमत में हाजिर न हो सके । हुजूर गरीब नवाज र0 अ0 ने हजरत ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी र0 अ0 से मालूम किया कि-‘तुम्हारे मुरीदों में से क्या कोई नेमत पाने से रह गया है ?‘ कुतुब साहब ने अर्ज किया कि एक मुरीद रह गया है जो चिल्ले में बैठा है और वह मसऊद है यानी बाबा फरीदुद्दीन गंज शंकर र0 अ0। यह सुनकर सरकार गरीब नवाज र0 अ0 ने फरमाया- आओ चलकर उसे देखे।‘ बाबा फरीदुद्दीन इस कदर कमजोर हो गये थे कि अदब के लिए खड़े भी न हो सके और उनकी आंखो से आंसू जारी हो गये। ख्वाजा साहब ने फरमाया-‘ ऐ बाबा बख्तिायार ! इस बेचारे को इबादत और तक्लीफों में कब तक घुलाते होगे कुछ तो दो। कुतुब साहब ने अर्ज किया-‘ हुजूर मैं आपके सामने क्या दे सकता हूं।‘

हुजूर ख्वाजा साहेब र0 अ0 उठे, बाबा फरीद र0 अ0 का एक बाजू खुद पकड़ा और ख्वाजा कुतुबुद्दीन र0 अ0 से फरमाया-‘ दूसरा बाजू तुम पकड़ो।‘ अब दोनो बुजुर्गो ने मिलकर क्या-क्या नेमते बाबा फरीद को अता की, खुदा ही जानता है। बाबा फरीद र0 अ0 बढे ही खुशनसीब थे कि उनको क्षुशकिस्मती से यह मौका मिला।

देहली के शेखुल इस्लाम नज्मुद्दीन का खराब बर्ताव

सुल्तान शम्सुद्दीन अलतमश, ख्वाजा बख्तिाया काकी र0 अ0 से बेपनाह अकीदत और मुहब्बत रखता था। सुल्तान का कुतुब साहब र0 अ0 से इतना गहरा सम्बन्ध देखकर कई ओहदादारों के दिल में हसद की आग भड़क उठी और उन्होने कुतुब साहब को दहेली से निकालने की कोशिश शुरू कर दी।

एक बार जब हुजूर ख्वाजा गरीब नवाज र0 अ0 देहली आये तो देहली के लोगों ने आपकी खिदमत में हाजिर होकर अकीदत पेश किया, न आये तो आपके पीर भाई शेख नज्मुद्दीन सुगरा जो देहली के शेखुल इस्लाम थे। एक रोज हुजूर ख्वाजा गरीब नवाज र0 अ0 खुद उनसे मिलने के लिए उनके मकान पर पहुंचे। देखा कि शेखुल इस्लाम मकान के सेहन में खड़े हुए चबूतरा बनवा रहे है पहले तो हुजूर की तरफ ध्यान ही नही दिया और मिले भी तो बड़ी बेरूखी से । इस पर गरीब नवाज र0 अ0 ने फरमाया-‘देहली की शुखल इसलामी ने तरो दिमाग खराब कर रखा है।‘ जवाब में अर्ज किया-‘ बन्दे की हकीकत पसन्दी में तो कुछ भी फर्क नही आया लेकिन यह शिकायत जरूर है कि आपके खलीफा के होते हुए मेरी शेखुल इस्लामी को कोई भी नही पूछता।‘ सरकार गरीब नवाज र0 अ0 ने उन्हे तसल्ली देते हुए फरमाया-‘घबराओ नही मैं बाबा बख्तियार को अपने साथ ले जाऊगा।‘

बस फिर क्या था कुतुब-साहब अपने शेख के साथ अजमेर शरीफ रवाना हो गये। जब लोगो को यह बात मालूम हुई तो उनके रंज व गम का कोई ठिकाना न रहा। पूरे दहेली शहर में तहलका और कोहराम मच गया। सभी शहर वाले सुल्तान रूाम्सुद्दीन के साथ आपके पीछे निकले जिस जगह शेख कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी र0अ0 कदम रखते थे लोग उस जगह की खाक तबर्रूकन उठा लेते थे और बहुत आह व जारी करते थे। हुजूर ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती र0 अ0 ने जब यह सूरत देख्री तो फरमाया-‘ बाबा बख्तियार! तुम यही रहो, मै हरगिज इस बात का जायज नही समझता कि इतने दिल खराब और कबाब हों। जाओ मैने इस शहर का तुम्हारी पनाह में छोड़ा।‘ सुल्तान शम्सुद्दीन अलतमश ने ख्वाजा गरीब नवाज र0 अ0 की कदमबोसी हासिल की और ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी र0 अ0 के साथ बहुत खुशी-खुशी शहर की तरफ रवाना हुआ। उधर ख्वाजा गरीब नवाज र0 अ0 अजमेर शरीफ रवाना हो गयें।

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