खुरासान की मुख्तसर तारीख

Khwaja Moinuddin Chishti – Garib Nawaz- History in Hindi

खुरासान की मुख्तसर तारीख

हुजूर ख्वाजा गरीब नवाज र0 अ0 जिस जमाने में पैदा हुए वहबड़ा ही पुर आशोब जमाना था। बे-रहम तातारियों ने हर तरफ कत्ल व गारतगरी और लूट का बाजार गर्म कर रखा था। अम्न व चैन किसी को भी नसीब नही था। इन दरिन्दों ने खुरासान पर हमला कर दिया और सुल्तान सन्जर को उनसे इलाका था जिसमें एक तरफ तातरियों ने जुल्म ढा रखा था और दूसरी तरफ अकाइदे इस्लाम के खिलाफ सख्त कारगुजारी कर रहे थे क्योकि सुल्तान खुरासान को शिकस्त हो चुकी थी, इसलिए तातारी इलाके के लोग बिना किसी रोक-टोक के खुरासान में दाखिल हो गये और कई शहरो जैसे ओश (मशहद) मुकद्दम और नेशापूर को बर्बाद करके डाल दिया। लड़कों और लड़कियों को गुलाम और लौंडी बनाया और तमाम मस्जिदों को तबाह व बर्बाद कर दिया बेगुनाह लोगों की लाशों के ढेर लग गये और बहुत से बड़े-बड़े आमि बेगुनाह शहीद कर दिये गये।

उस वक्त ख्वाजा साहब र0अ0 की उम्र सिर्फ तेरह साल की थी ऐसा खौफनाक खून-खराबा देखकर आपका दिल बेचैन हो गया। होश संभाला ही था कि ये खतरनाक वाकियात नजर से गुजरे।

वालिद बुजुर्गवार का विसाल (निधन)

ख्वाजा साहब र0 अ0 की उम्र अभी चैहद साल की थी कि बाप का साया सर से उठ गया और आप यतीम हो गये। वालिद ने तरके में एक बाग और पवन चक्की छोड़ी थी जो आपके हिस्से में आई, वालिद माजिद की मृत्यु के कुछ महीने बाद वालिदा का इस दुनिया से चली गई। इस सख्त सदम का उन पर बहुत असर हुआ। और हमारे ख्वाजा बे.यार व मददगार रह गये। उस वक्त आपकी उम्र सिर्फ पन्द्रह साल की थी। इतनी उम्र में माँ-बाप का साया सर से उठना कोई मामूली बात नही। आपने सब किया मगर दुनिया से दिल उचट गया। आपने फैसला किया, ‘‘ यह दुनिया कुछ भी नही है।‘‘ हकीकी और असल राहत इन्सान को उसी वक्त मिल सकती है जबकि वह अपने खुदा को पहचान ले। मगर इस राह में भी रहनुमा की जरूरत थी। गुजारे के लिए सिर्फ एक बाग और एक पवन चक्की थी जो बाप की तरफ से तरके में मिली थी। हमारे ख्वाजा र0 अ0 पौधों की देखभाल करते, इनको पानी देते और काट-कांट करते थे। हर तरफ से बाग की निगरानपी करते और इसी पर अपना गुजर-बसर करते थे।

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