ख्वाजा साहब र0 अ0 हिन्दुस्तान की जमीन पर

Khwaja Moinuddin Chishti History in HindiGarib Nawaz History in Hindi

ख्वाजा साहब र0 अ0 हिन्दुस्तान की जमीन पर

सब्जावार से रवाना होकर ख्वाजा गरीब नवाज र0 अ0 गजनी पहंुचे। वहां सुलतानुल मशाइख्र शेख अब्दुल वाहिद र0 अ0 से मुलाकात हुई आपके साथ हजरत कुतुबुल अक्ताब ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तयार काकी र0अ0 शेखुल मशाइख्र हजरत मुहम्मद यादगार र0अ0 और सैय्यिदुस्सादात हजरत ख्वाजा फखरूद्दीन गुरदेजी र0 अ0 भी थे।

अल्लाह वालों का यह काफिला अब हिन्दुस्तान की सरहद पर था, सामने बड़े-बड़े और ऊंचे पहाड़ रास्ता रोके खडे थे लेकिन हुजूर ख्वाजा गरीब नवाज र0 अ0 का अज्म (इरादा) और हिम्मत उन पहाड़ो से ज्यादा अटल और मजबूत था। आपने अल्लाह का नाम लेकर कदम आगे बढाया और उन देव जैसे पहाड़ो, घटियों और दुश्वार रास्तों को पार करते हुए हिन्दुस्तान के सरहदी इलाके पंजाब में दाखिल हो गए।

जिस वथ्त हजरत ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती र0 अ0 हिन्दुस्तान में दाखिल हुए सुलतान शहाबुद्दीन मुहम्मद गौरी और उसकी फौज पृथ्वीराज से हार का गजनी की तरफ वापस जा रही थी। उन लोगों ने ख्वाजा साहब र0 अ0 और आपके हमराहियों से कहा कि आप लोग इस वक्त आगे न बढ़े बल्कि वापस लौट चलें क्योकि मुसलमानों के बादशाह की हार है, आगे बढ़ना आपके लिए ठीक नही है। अल्लाह वालों के इस गिरोह ने जवाब दिया कि तुम तलवार के भरोसे पर गये थे और हम अल्लाह के भरोसे पर जा रहे है। अल्लाह वालों का यह काफिला आगे बढ़ता रहा। किला शादमान और मुलतान होता हुआ दरिया-ए-रावी के किनारे पहंुच गया।

दरिया-ए-रावी के उस पार पंजाब की राजधानी लाहौर आबाद थी और उसके मन्दिरों और शिवालयों की ऊंची-ऊंची और सुनहरी कलागियां दूर से ही बता रही थी कि यह शहर बड़ी अजमत और शान वाला है। ख्वाजा गरीब नवाज र0 अ0 और आपके हमराहियों ने दरिया पार करके शहर से बाहर हजरत अली बिन उसमान हिजवेरी उर्फ दाता गंज बख्श र0 अ0 के मजार पर कियाम फरमाया जो शहर के करीब था।

हजरत दाता गंज बख्श र0 अ0 अपने वक्त के बेमिसाल आलिम-व-फाजिल, आबिद व जाहिद औश्र बडे कामिल बुजुर्गो में से एक थे। हुजूर ख्वाजा गरीब नवाज रन0 अ0 ने यहां उतिकाफ फरमाया औश्र दिल्ली सुकून हासिल किया फिर वहां से रवाना हुए। रवाना होते वक्त आपने हजरत दाता गंज बख्श र0 अ0 की शान में निम्नलिखित शेर पढ़ा-

गंज बख्शै फैजे आलम मजहरे नूरे खुदा,
नाकिसांरा पीरे कामिल कामिलांरा रहनुमा।

गंज बख्श ने दुनिया की भलाई के लिए खुदा के नूर की लहर फैलाई है। गुनहगारो के लिए योग् गुरू और जानकारों के लिए रहनुमा (पथ प्रदर्शक) है।

यह शेर नवाज र0 अ0 की जबाने मुबारक से अगरचे बेसाख्ता निकला था, लकिन यह आपके सच्चे जज्बात व एहसासात का आईनादार है और और इसकी मकबूलियत (लोकप्रियता) का यह आलम है कि आज तक लोग इसे बतौर वजीफा पढ़ते है।

ख्वाजा गरीब नवाज र0 अ0 लाहौर से राना होकरशमाना (पटियाला) में पहुंचे। वहां के लोग देखने में तो आपके हमदर्द मालूम होते थे मगर अन्दर से आपको नुकसान पहंुचाना चाहते थे। असल में बात यह थी कि दिल्ली और अजमेर के राजा पृथ्वीराज की मांग इल्में नुजूम (ज्योतिष विद्या) की जानने वाली थी। उसने अपने इल्म से अपने बेटे को आगाह (सचेत) कर दिया था कि ऐसी शक्ल सूरत और हुलिया का एक शख्स उसके राज में आयेगा जो तेरी ताबाही का ािरण बनेगा। राजा ने इसी कथन के अनुसार चित्रकारो से तस्वीरे बनवाई और सरहदो पर भेज दी। साथ ही साथ यह हुक्म दिया कि इस सूरत का शख्स जहां भी मिले तुरन्त कत्ल कर दिया जोय। जब ख्वाजा गरीब नवाज र0 अ0 शमाना में पहंुचे तो राजा के आदमियों ने आपको उसी शक्ल व सूरत का पाकर आपको रोकना चाहा ख्वाजा साहब को बजरिए कशफ (अन्तर ज्ञान) मालूम हो गया कि मेजबानो की नियते बिगड़ी हुई है। अज्ञैर वे लोग आपके साथ दगा व फरेब करना चाहते है इसलिए आप अपने हमराहीयों को लेकर वहां से इस तरह बचकर निकल गये कि दुश्मनों को खबर तक नही हुई।

देहली में आगमन

शमाना से रवाना होकर ख्वाजा गरीब नवाज र0अ0 देहली पहंुचे आपने देहली में राजा खण्डेराव के महल के सामने कुछ फासले पर अपना कियाम फरमाया और इस्लाम फैलाने का कार्य शुरू कर दिया आपके अंदाजे तबलीग इतना दिलनशीन आपकी जाते अक्दस इस कदर थी पुरकशिश थी कि आपके आप आने वाले में ज्यादातर लोग ईमान ले आते थे। धीरे-धीरे मुसलमानों की तदात बढ़ना शुरू हो गई। और कुछ ही समय में देहली इमें इस्लाम के इस तेजी से फैलने से तहलका मच गया। आखिरकार शहर के कुछबा-असर लोग खांडे राव हाकिम के पास गये और अर्ज किया कि इन पापी (नऊजुबिल्लाह) मुसलमान फकीरों की अमद से हमारे देवता नाराल हो गये है। अगर तुरन्त इनको यहां से निकला नही गया तो डर है कि देवताओ का कहर सल्तनत की तबाही का कारण बन जायेगा। खांडे राव ने हुक्म जारी कर दिया कि फकीरो से देहली से तुरन्त निकाल दिया जाये। लेकिन उसकी कोई चाल कामयाब नही हुई क्योकि हुकूमत के आदमी जब कोई कार्यवाही करने के लिए आपके पास आते तो आपके बर्ताव, उच्च व्यक्तित्व और सत्यवादिता से इस तरह से आकर्षित होते कि तुरन्त इस्लाम काबूल करके आपके जा-निसारों में शामिल हो जाते।

खांडे राव का जब कोई बस न चला तो उसने एक शख्स को कुछ लालच देकर इस बात पर राजी कर लिया कि वह सरकार गरीब नवाज र0अ0 को कत्ल कर दे। वह शख्स अकीदतमन्द बन कर हाजिर हुआ आप पर इसकी आमद का मकसद जाहिर हो गया। और आपने फरमाया-‘ अस अकीदतमन्दी से क्या फायदा, जिस काम के लिए आया है क्यो नही करता।‘

इस बात को सुनकर वह कांपने लगा और बगल में दबा हुआ खंजर जमीन पर गिर पड़ा। इस रोशन जमीरी को देखकर वह शख्स आपके कदमों में गिर पड़ा और ईमान लाकर इस्लाम में दाखिल हो गया।

जब ख्वाजा गरीब नवाज र0 अ0 ने यह देखा कि अब दहेली में इस्लाम की काफी चर्चा हो चुकी है तो आपने अपने खलीफा-ए- अकबर हजरत ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी र0 अ0 को इस्लाम फैलाने के लिए वहां छोड़ा और खुद अपने चालीस जांनिसारो के साथ अजमेर के लिए रवाना हो गये। इस सफर में आपने तबलीग व हिदायत का काम इस सुन्दर तरीके से अन्जाम दिया कि अजमेर पहुंचते-पहुंचते सैकड़ो आदमी आपके साए में ईमान लाकर मुसलमान हो चके थे।

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