ख्वाजा साहब र0 अ0 हिन्दुस्तान की राह पर

Khwaja Moinuddin Chishti History in HindiGarib Nawaz History in Hindi

ख्वाजा साहब र0 अ0 हिन्दुस्तान की राह पर

हिरात से कूच करके ख्वाजा साहब र0ब0 सब्जावार पहंुचे। सब्जावार का हाकिम शेख मुहममद यादगार बड़ा जालिम निर्दयी और बदअख्लाक शख्श था। शीया मजहब रखता था और खलीफाओं के नाम का दुश्मन था। उसने शहर के बाहर एक बाग लगवाया था जो बड़ा सुन्दर था। ख्वाजा साहब र0 अ0 उस बाग में दाखिल हो गए और हौज में नहाये और नमाज अदा करके कुरआन पाक की तिलावत करने लेग। इतिकाफ की बात है कि बाग का हाकिम सैर व तफरीह के लिए आने वाला था। बाग के मालियों ने आपसे कहा कि बाग में न ठहरें क्योकि अगर हाकिम ने देख लिया तो खैर नही। आपने फरमाया-‘ तुम इसका खौफ न करो।‘ इतने में खबर आयी कि हाकिम की सवारी आ गयी, नौकर अदब से खड़े हो गये।

ख्वाजा साहब के खादिम में कहीं सुन लिया थ कि हाकिम फकीरों और औलियाओं के बारे में अच्छा ख्याल नही रखता, मुमकिन है कोइ नुक्सान पहंुचाये, इस ख्याल से उसने ख्वाजा साहब से अर्ज किया-बाग में अब बैठना मुनासिब नही, अगर कुछ हरज न हो तो किसी दूसरी जगह तशरीफ ले चलें ? आपने मुस्कराते हुए फरमाया-‘ खौफ न करो और किसी पेड़ की आड़ में बैठकर कुदरत का तमाशा देखो।‘

जब हाकिम बाग में आया तो आप कुरआने पाक की तिलावत कर रहे थे। आपको अपनी गद्दी के पास बैठा देखकर उसको सख्त गुस्सा आया और उसने अपने नौकरो को डांटा और कहा-‘इस फकीर को यहां से क्यो नही उठाया?‘

सभी नौकर घबरा गये और खौफ से कांपने लगे। ख्वाजा गरीब नवाज र0 अ0 ने जो नजर उठाकर उसकी तरफ देखा तो वह हुजूर का रौब व जलाल देखते ही कांप उठा और बेहोश हाकर जमीन पर गिर पड़ा।

मुहम्मद यागार के नौकरो ने जब यह देखा तो बहुत परेशान हुए और ख्वाजा साहब की खिदमत में हाजिर होकर आजिजी से माफी मांगी और दया की दरख्वास्त की।

ख्वाजा साहब र0अ0 ने दया करके अपने खादिम को बुलाया और हुक्म दिया कि बिस्मिल्लाह पढ़ कर इसके मुंह पर पानी छिड़को। खादिम ने जैसे ही उसके मुंह पर पानी डाला, होश में आ गया। बहुत शर्मिन्दा हुआ और अपनी बदसुलूकी की माफी मांगने लगा। आपने उसकी बात को अजरअंदाज करते हुए फरमाया-‘तू मुझसे माफी मांगता है और रसूलुल्लाह स0अ0स0 की दिल आजारी करता है। रसूलुल्लाह स0अ0स0 के उच्च खानदान के साथ मुहब्बत का दावा करना और उनकी पैरवी न करना बेमायने है।

हुजूर गरीब नवाज र0अ0 ने महान सहाबियों के गुण कुछ इस अन्दाज में बयान किए कि सभी हाजरीन दंग रह गए। शेख मुहम्मद यादगार औश्र उनके साथी रोने लगे। हजरत ख्वाजा गरीब नवाज र0अ0 की इस नसीहत का सब्जावार के हाकिम पर बड़ा असर हुआ और वह आपकी विचाार धारा में शामिल होकर आपका शागिर्द बन गया।

अब शेख ने अपना सब माल नकद और दूसरी चीजें गरीब नवाज र0अ0 की खिदमत में पेश कर दी, लेकिन आपने उसे कुबूल नही किया और फरमाया-‘जिन लोगो से तुमने यह माल जबरन वसूल किया है उन्ही के हवाले कर दो ताकि कल कियामत के दिन कोई शख्स तुम्हारा दामन न पकड़े। लिहाजा उन्होने हुजूर के फरमान के मुताबिक जिनका माल था उनको लौटा दिया और जो कुछ बाकी बचा उसे फकीरों और अनाथें में तक्सीम (बांट) कर दिया। दुनिया को छोड़कर ख्वाजा गरीब नवाज र0 अ0 की संगत में रहने लगे। ख्वाजा साहब ने आपको खिलाफत अता फरमाकर हिसार शहर की विलायत बख्शी, गमर आप ख्वाजा साहब र0 अ0 की जुदाई अर्दाश्त न कर सके और हमेंशा आपके साये में रहे। ख्वाजा साहब र0 अ0 की वफात के बाद भी मजारे मुबारक पर खादिम बन कर आखरी दत तक खिदतम करते रहे। आपका मजार मुबारक रौजा-ए-अक्दस के करीब ही शुाल मशरिक (पूर्वोतर) दिशा में अब भी मौजूद है।

हजरत शेखुल मशाइख्र मुहम्मद यादगार र0 अ0 की औलादें अब तक अजमेर शरीफ में मौजूद है उनको हजरत ख्वाजा गरीब नवाज र0 अ0 के मजारे मुबारक की खिदमत का हक हासिल है। यह शेखजादे कहलाते है।

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