सुल्तानुल हिन्द अजमेर में

Khwaja Moinuddin Chishti History in HindiGarib Nawaz History in Hindi

सुल्तानुल हिन्द अजमेर में

अजमेर पहुंचकर आपने शहर से बाहर एक सायादार पेड़ के नीचे कियाम फरमाया। अभी बैठे ही थे कि चन्द ऊंट वालों ने आकर बढ़े सख्त शब्दों में कहा-यहां से हट कर कही और बैठों, यह जगह राजा के ऊंटों के बैठने की है। हुजूर गरीब नवाज र0 अ0 ने कहा-‘ऊंटों को कही भी बिठा सकते हो, बहुत जगह पड़ी है।‘ मगर ऊंट वाले न माने और जबरदस्ती पर उतर आए। इसलिए सरकार गरीब नवाज र0 अ0 ने नर्मी से फरमाया-‘लो बाबा! हम यहां से उठ जाते है तुम्हारे ऊंट ही बैठे रहेंगे।‘ यह कहकर आप अपने मुरीदों के साथ आना सागर के किनारे जाकर एक पहाडभ् पर ठहर गये। दूसरी सुबह ऊंट वालों ने लाख कोशिश की मगर ऊंट खड़े न हो सके। ऐसा मालूम होता था कि जमीन ने उन्हे पकड़ लिया है। यह हालत देखकर ऊंट वाले बहुत परेशान हुए, जब उनकी कोई तदबीर काम न आयी तो मजबूर होकर राजा पृथ्वीराज के दरवार में तारागढ़ पर हाजिर हुए। राजा ने जब उनकी दजबानी यह अजीब व गरीब माजरा सुना तो हैरत में पड़ गया। उसे अपनी बहाुदरी पर बड़ा नाज (गर्व) था, लेकिन ख्वाजा साहब र0 अ0की इस पहली ही करामत से उसकी सारी की सारी बहरुदरी धरी की धरी रह गयी। लाचार होकर उसने ऊंच वालों का हुक्म दिया कि जाओं उसी फकीर से माफी मांगो जिसकी बद्दुआ का यह नतीजा है, ताकि ऊंट खड़े हो जाएं। अतः सब ऊंट वालों ने हुजूर गरीब नवाज र0 अ0 की खिदमत में हाजिर होकर बहुत आजिजी से माफी मांगी, आपने माफ कर दिया और फरमाया-‘जाओं! खुदा की मेहरबानी से तुम्हारे ऊंट खड़े हो जायेगे। ऊंट वालो ने जब वापस आकर देखा तो उनकी खुश और आश्चर्य की कोई सीमा न ही क्योकि उनके सब के सब ऊंट खड़े थे।

हुजूर गरीब नवाज र0 अ0 और आपके साथी रोज आना सागर के पास घाट पर वुजू और गुस्ल(स्नान) किया करते थे, चंकि घाट पर मन्दिरों की इमसरतें थी, इसलिए मन्दिरों के पुजारियो को यह बात सख्त नागवार गुजरी। एक दिन हुजूर गरीब नवाज र0 अ0 के कुछ मुरीद आना सागर पर नहाने के लिए गये। मुरीद फरियाद लेकर ख्वाजा गरीब नवाज र0 अ0 की खिदमत में हाजिर हुए। आपने पूरा हाल सुनकर अपने एक मुरीद से फरमाया-‘ जाओ कूजे (मिट्टी के बर्तन) में तालाब का पानी भर लाओं।‘ अतः वह मुरीद आना सागर पर पहुंचकर तालाब का पानी भरने के लिए जैसे ही ही कूजे को तालाब में डाला आना सागर का सारा पानी उस कूजे में आ गया। मुरीद ने कूजे को हुजूर की खिदमत में पेश कर दिया। जब तालाब के सूखने का पुजारियों का पता चला तो उनके होश उड़ गये । इधर शहर में कोहराम मच गया। लोग पानी के लिए तड़प उठे और यह बात पूरे शहम में फैल गयी कि मुसलमानों को घाट पर मारा-पीटा गया था इसलिए उनके गुरू ने सारा पानी गायब कर दिया है। शहरियों का एक गिरोह सरकार गरीब नवाज र0 अ0 से बड़ी मन्नत व समाजत से माफी मांगने लगा। आपने दयापूर्वक उसे कूजे का पानी वापस तालाब में डलवा दिया और तालाब पहले जैसा पानी से भर गया। इस वाकिया को देखकर बहुत से लोग ईमान ले आये और इन करामात के बाद अजमेर में इस्लाम बड़ी तेजी से फैलने लगा।

शादी देव का ईमान लानस

अजमेर के सभी बुतखानो का पेशवा शादी देव था जो जादू शादी मन्दिर में रहता था। हिन्दु धर्म का बड़ा जानकार शख्स था और सब पुजारियों का सरदार था। पूरी जनता पर उसका असर था। जब उसने बुतखानों की वीरानी के आसार देखे तो तिलमिला उठा और बहुत चिंतित हुआ। मन्दिरों के पुजारियों ने भी इसको ख्वाजा साहब की मुखालफत पर उभारा। मन्दिरों के सब रहने वालों ने मिलजुल कर शादी देव को आपके मुकाबले पर ला खड़ा किया। उनकी नियत बुरी थी और ख्वाजा साहब को नुकसान पंहुचाना चाहते थे, मगर ख्वाजा साहब र0 अ0 ने उन पर एक ऐसी नजर डाली कि सब के सब थरथरा कर कांपने लगे और चैकड़ी भूल गये। शादी देव तुरन्त हुजूर के कदमोें पर गिर पड़ा और आजिजी से माफी मांगने लगा। ख्वाजा साहब र0अ0 ने उसे कलिमा-ए-हक पढाया और उसने खुशी से इस्लाम कुबूल कर लिया। उसका इस्लामी नाम शाद रखा गया। उसके हमराहियों में से भी अक्सर ने तौबा की और ईमान ले आये। इस घटना से सब जगह हलचल मच गयी और पृथ्वीराज भी चिंतित हो गया।

अजय पाल योगी का मुसलमान होना

अजमेर में इस्लाम के तेजी से फैलने पर पृथ्वीराज को बहुत चिन्ता हो गयी थी। इसलिए उसने हुजूर गरीब नवाज र0अ0 के मुकाबले के लिये अपने खानदानी गुरू की मदद ली, जिसका नाम अजय पाल योगी था। अजय पाल हिन्दुस्तान का सबसे बड़ा और बा कमाल जादूगर था जो अजमेर के पास ही जंगल में रहता था। राजा ने बुलाकर ख्वाजा साहब का सब हाल उसे सुना दिया। अजय पाल योगी ने हुजूर के उन मामूली करामात को हाथ की सफाई और नजरबन्दी समझाा। उसने राजा को यकीन दिलाया कि उस ुकीर को यहां से निकाल दूगा। मृग छाल पर बैठा और अपने सभी शागिर्दो को साथ लेकर आना सागर की तरफ रवाना हुआ वहां सरकार गरीब नवाज र0 अ0 ठहरे हुए थे। शैतानों का यह लश्कर उड़न शेरों पर सवार हाथों मतें अजगरों के कोड़े लिए हुए जंगलियों की तरह चिल्लाते-चिल्लाते आना सागर के किनारे आ जमा हुजूर गरीब नवाज र0 अ0 के नये मुसलमान शागिर्द उस शैतानी लश्कर को देखरकर घबरा गये। उसी वक्त आपने उपनी उंगली से लकीर खींच दी और फरमाया-‘ इसके बाहर न जाना महुफूज (बचे) रहोगे।‘.

अजय पाल और उसके चेलों ने अपने हाथों से जादू के अजगर छोड़ दिये जो हजरत की तरफ बडभ् तेजी से लपके, मगर उस लकीर तक आकर सब के सब जल गये। इस तरकीब के नाकाम होने से जादूगरों ने आग बरसाना शुरू कर दिया, मगर उस आग ने भी सरकार गरीब नवाज र0अ0 और आपके साथियों पर कोई असर नही किया बल्कि वह आग वापस लौट गई और उससे जादूूगर ही जल कर खाक होने लगे। जब उनका कोई करतब कारगर न हुआ तो अजय पाल ने तय किया कि आसमान पर पहुंचकर वार किया जाये। अतः वह आसमान की तरफ उड़ने लगा ताकि हवा में रहकर हमला कर सके। जब हुजूर गरीब नवाज र0 अ0 की नजर उस पर पड़ी तो आपने अपनी जूतियों को इशारा किया कि उस बेदीन नीचे उतार लायें। जूतियों ने उड़ान भरी और आन की आन में अजय पाल के सि पर पहुंचकर तड़ातड़ पड़ने लगी। थोड़ी देर बाद क्या देखते हैं कि जमतियां अजय पाल के सिर पर मुसल्लत (छा गई) हैं और वह लाचार नीचे उतरा चला आ रहा है। आखिर घमंड का सर नीचे हुआ। अजय पाल की आंखों से अब पर्दे उठ चुके थे और उसने समझ लिया था कि जादू बेकार है। आज तक जादू सीखने में जिन्दगी बर्बाद की इसलिये आंखों में आंसू भर लाया और माफी मांगी। ख्वाजा साहब र0अ0 ने दया करके उसे माफ कर दिया और वह सच्चे दिल से मुसलमान होकर आपके चाहने वालों में शामिल हो गया। हुजूर ने उसका इस्लामी नाम अब्दुल्लाह रखा। उसके बाकी चेलजे भी मुसलमान हो गये अज्ञैर जितने आदमियों ने किनारे पर यह घटना देखी वे सब भी मुसलमान हो गये।

अजय पाल के ईमान लाने के बाद हुजूर गरीब नवाज की खिदमत में इल्तिजा की कि हुजूर अपने मदारिजे आला से आगाह फरमायें आपने मुस्कुराकर फरमाया-‘आंखे बन्द करो।‘ आंखे बन्द करते ही उसने देखा कि तमाम हिजाबात (पर्दे) उठना शुरू हो गये और आलमें बरजख आसमान और यहां तक कि अर्शे आजम तक की सैर करा दी। जब उसकी तबीयत सैर हो गयी तो हुक्म दिया कि आंखे खोलो, आंखे खोलकर हुजूर के कदमों पर गिर पड़ा हुजूर ने बहुत मुहब्बत से उसे उठाया और इतना ज्यादा करम फरमाया कि उसे बौलिया के दरजे तक पहुंचा दिया। अब उसने एक और इल्तिजा पेश की कि मैं हयातें अबदी का तालिब हूं। हुजूर ने बारगाहे खुदावन्दी में अर्ज गुजारी जिस पर शरफे कबूलियत हासिल हो गया। कहा जाता है कि अब्दुल्लाह जिन्दा है और भूले-भटके मुसाफिरों को रास्ता बताते है। अजमेर और उसके आस-पास के लोग उन्हे अब्दुल्लाह बियाबानी के नाम से पुकारते है।

इस्लाम का तेजी से फैलना

अजय पाल योगी के मुसलमान होते ही एक तहलाक पूरे अजमेर शहर मूें मच गया था और लोग ख्वाजा र0 अ0 से अकीदत मन्दी का इज्हार करने लेग। शादी देव और अजय पाल ने मुसलमान होने के बाद ख्वाजा गरीब नवाज र0 अ0 की खिदमत में हाजिर होकर आबादी में कियाम फरमाने की अपील की। आपने आना सागर से उठकर उस जगह आकर कियाम किया जहां आजकल दरगाह शरीफ है। यह जगह शादी देव की मिलकियत में थी।

इस घटना से राजा मुतास्सिर और (प्रभावित) चिन्तित हुआ और उसके सीने में गुस्से की आग भड़कने लगी। उधर हुजूर गरीब नवाज र0 अ0 ने इस्लाम फैलाने का काम और तेज कर दिया। अल्लाह तआला ने आपको असल में ऐसी नजर अता फरमाई थी कि जिसपर एक बार नजर डाल देते आपकी मुहब्बत में डूब जाता, आपकी जबान में इतनी मिठास थी कि हर आने वाला आपकी मेहमान नवाजी और हमदर्दी से असर अन्दाज होकर आपके गिरोह में शामिल हो जाता । लोग आपकी खिदमत में भारी तायदाद में आने और मुसलमान होने लगे। इस तरह हजारों आदमी कुफ्र (नास्तिक) के अंधेरे से निकलकर इस्लाम की रोशनी में आ गये।

पृथ्वीराज को दावते इस्लाम

शादी देव और अजय पाल के इस्लाम कुबूल करने के बाद हुजूर गरीब नवाज र0अ0 ने पृथ्वीराज के पास पैगाम भेजा कि-‘ इस्लाम कुबूल करो। इसी में तुम्हारी भलाई है। बादशाह भी हाथ से न जायेगी और मरने के बाद भी चैन मिलेगा, वरना खूब याद रखों कि तुम्हारे लिये यहां और वहां दोनो जगह बड़ी मुसीबत का सामना है और उस वक्त तुमसे कुछ बनाये न बन पड़ेगा।‘ मगर उसके दिल पर कुछ असर न हुआ और ख्वाजा साहब का यह पैगाम सुनते ही आग बगोला हो गया। उसने इम्तिहान लेने के लिए एक शख्स को हुजूर की खिदमत में मुरीद बनना चाहा। आपने उसे मुरीद बनाने से इन्कार कर दिया। मालूम होने पर आपने फरमाया कि मुरीद न करने के तीन कारण है। पहला यह कि तेरे दिल में दगा और गन्दगी है। दूसरा यह कि शिर्क तेरीतबियत से इस तरह बसा हुआ है कि खुदा के सिवा हर एक के सामने सर झुकायेगा। तीसरा यह कि मैने तेरे लिए लौहे महफूज में देखा है कि तू दुनिया से बेईमान जायेगा। यह सुनकर वह शख्स हैरान हो गया और राजा की खिदमत में जाकर सब हाल बयान कर दिया।

ख्वाजा गरीब नवाज र0अ0 और पृथ्वीराज के बीच कशमकश बराबर जारी थी और अब दुश्मनी और बढ़ गयी। राजा का जब किसी तरह हुजूर गरीब नवाज र0 अ0 पर बस न चला तो उसनेसारे मुसलमानों पर जुल्म ढाने शुरू कर दिये। उसका एक दरबारी जो मुसलमान होकर ख्वाजा साहब र0 अ0 का मुरीद हो गया था उसके खूब तक्लीफें दी गयी। उस मुरीद ने ख्वाजा साहब र0 अ0 की खिदमत में हाजिर होकर फरियाद की कि मेरी सिफारिश की जाये ताकि राजा अपने जुल्म से बाज ओय। ख्वाजा साहब की मुरीद नवाजी मशहूर है। आपने राजा को इससे बाज रहने की सिफारिश की लेकिन राजा ने एक न मानी और गुस्से में हुक्म दिया कि यहां के राजा होने के नाते हमारा हुक्म है कि एक हफ्ते के अंदर अपने साथिंयों समेत अजमेर खाली कर दो वरना सख्ती से निकाल दिया जायेगा। जब यह हुक्मनामा हमारे ख्वाजा साहब र0अ0 के पास पहंुचा तो आपको जलाल आ गया और फरमाया-‘ हमने पृथ्वीराज को जिन्दा गिरफ्तार करके लश्करे इस्लाम के हवाले कर दिया।‘ ख्वाजा साहब र0 अ0 की जबाने मुबारक से यह जुम्ला सुनकर लोग हैरान थे, मगर उन्हे यकीन था कि ख्वाजा साहब र0अ0 की जबान से निकली हुई बात बेअसर नहीं हो सकती इसीलिए बड़ी बेकरारी से नतीजे का इन्तिजार करने लेग।

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