Taleem & Tarbiyat

तालीम व तर्बियत


    इब्दताई तालीम घर पर हुई। आपके पालिद बुजुर्गवार एक बड़े आलिम थे ख्वाजा साहब ने नौ साल की उम्र में कुरआन मजीद हिफ्ज कर लिया और इसके बाद सन्जर के मक्तब में दाखिला हुआ। आपने यहां इब्तदाई तौर से तफ्सीर फिक्ह और हदीस की तालीम पाई और थोड़े समय में आपने काफी इल्म हासिल कर लिया।

खुरासान की मुख्तसर तारीख
हुजूर ख्वाजा गरीब नवाज र0 अ0 जिस जमाने में पैदा हुए वहबड़ा ही  पुर आशोब जमाना था। बे-रहम तातारियों ने हर तरफ कत्ल व गारतगरी और लूट का बाजार गर्म कर रखा था। अम्न व चैन किसी को भी नसीब नही था। इन दरिन्दों ने खुरासान पर हमला कर दिया और सुल्तान सन्जर को उनसे इलाका था जिसमें एक तरफ तातरियों ने जुल्म ढा रखा था और दूसरी तरफ अकाइदे इस्लाम के खिलाफ सख्त कारगुजारी कर रहे थे क्योकि सुल्तान खुरासान को शिकस्त हो चुकी थी, इसलिए तातारी इलाके के लोग बिना किसी रोक-टोक के खुरासान में दाखिल हो गये और कई शहरो जैसे ओश (मशहद) मुकद्दम और नेशापूर को बर्बाद करके डाल दिया। लड़कों और लड़कियों को गुलाम और लौंडी बनाया और तमाम मस्जिदों को तबाह व बर्बाद कर दिया बेगुनाह लोगों की लाशों के ढेर लग गये और बहुत से बड़े-बड़े आमि बेगुनाह शहीद कर दिये गये।
उस वक्त ख्वाजा साहब र0अ0 की उम्र सिर्फ तेरह साल की थी ऐसा खौफनाक खून-खराबा देखकर आपका दिल बेचैन हो गया। होश संभाला ही था कि ये खतरनाक वाकियात नजर से गुजरे।