Gumbad Mubarik

Gumbad Mubarak (Dome)

Inside the gumbad mubarak, there is a silver ‘Chaparkhat’ (canopy) inlaid with pieces of mother-of-pearl presented by Emperor Jahangir. Between the four poles supporting this `chaparkhat’, there is silver `katehra’ (railing) with an arch towards the south. There is another outer silver katehra running around the tomb at a distance of about 2 feet. The devotees are led into this space to offer flowers and prayers over the tomb. The ceiling of the dome is covered by a costly velvet chatgiri. A peculiar kind of fascinating aroma prevails in the shrine which inspires the visitors with a spontaneous and irresistible urge for devotion and homage towards the asleep saint. As soon as one enters the interior of the shrine, he feels as if he is in the presence of some exalted soul or mighty spiritual king.

Darbar Sharif

Over the Darbar, there is a silver ‘chaparkhat’ (canopy) inlaid with pieces of mother-of-pearl presented by Emperor Jahangir. Between the four poles supporting this `chaparkhat’, there is silver `katehra’ (railing) with an arch towards the south. There is another outer silver katehra running around the Darbar at a distance of about 2 feet. The devotees are led into this space to offer flowers and prayers over the Darbar. The ceiling of the dome is covered by a costly velvet chatgiri. A peculiar kind of fascinating aroma prevails in the shrine which inspires the visitors with a spontaneous and irresistible urge for devotion and homage towards the asleep saint. As soon as one enters the interior of the shrine, he feels as if he is in the presence of some exalted soul or mighty spiritual king


गुम्मद शरीफ के अन्दर रोशनी

मग्रिब की नमाज से करीब बीस मिनट पहले पुराने रिवाज के अनुसार रौजा-ए-मुनव्वरा में बिजली की सभी रोशनी बन्द कर दी जाती है और खालिस मोम की बनी हुई मोमबत्तियां रोशन की जाती हैं, उन बत्तियों को रोशन करते वक्त नीचे लिखे शेर पढ़े जाते हैं। अन्दरूने गुम्बद के चारों तरफ चैखटों पर आईनें लगे हैं और यह शेर उनपर सुनहरी शब्दों में लिखे हुए हैं।

ख्वाज-ए-ख्वाजगा मुईनुद्दीन (ख्वाजाओं के ख्वाजा मुईनुद्दीन है) अशरफे औलिया-ए-रूए जमीं (जमीन के बड़े औलियाओं में सब से बड़े हैं)

आफ्ताबे सपहरे कौनों मकां (आप कौन व मकां के सूरज हैं) बादशाहे शरीरे मुल्के यकीं (आप अकीदत के देश की राजगद्दी के बादशाह हैं।)

दर जमाल व ऊ चे सुखन (आपके जमाल और कमाल का मुकाबला काई नहीं कर सकता) ईं मुबैय्यन बुवद बहिस्ने हसीं (यह रोशन दलील मजबूत किले के समान है)

मतलऐ दर सिफाते ऊ गुफतम आपकी तारीफ में एक मतला पेश कर रहा हूं दर दबारत बुवद चू दुर्रे समीं (जिसकी इबारत अनमोल मोती है)

ऐ दरत किब्ला गाहे अहले यकीं (अकीदत मन्दो के लिए आपका दर किब्ला है) बर दरत मेहरो माह सुदा जबीं आपके दर पर चांद और सूरज परेशानी रगड़ते हैं)

रूबे बर दरगहत हमीं सायन्द (आपकी चैखट पर परेशानी रगड़ते हैं) सद हजारां मलिक चू खुसरूए चीं चीन के राजा जैसे सैकड़ों बादशाह)

खादिमाने दरत हमा रिजवा (आपके दरबार में खादिम गोया जन्नत के पहरेदार हैं।) दर सफा रोजाअत चूं खुल्दे बरीं (आपकी मजार मुबारक खुल्दे बरीं की तरह है)

जर्रा-ए-खाके ऊ अबीर सरिश्त (आपके मजार मुबारक की खाक का हर जर्रा अबीर की तरह है) कतरा-ए-आबे ऊ चू माए मोई (आपके दर के पानी की एक-एक बूंद जगमगाते मोती की तरह है)

इलाही ता बुवद खुर्शीद व माही (या इलाही जब तक चांद सूरज कामय है) चिरागे चिश्तियां रा रोशनाई चिश्तियों के चिराग को रोशन रख)

 

 

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