Masjid Sandalkhana

Masjid Sandalkhana

Built by Sultan Mahmud Khilji in 1452 A. D. and later renovated by Emperors Jahangir and Aurangzeb. It has marble tiling on the floor.


मस्जिद सन्दल खाना

इस मस्जिद का बयान अहाता-ए-चमेली के साथ हो चुका है। यह मस्जिद सुल्तान महमूद खिलजी की बनवाई हुई है। जहांगीर के जमाने में मस्जिद खस्ता व शिकस्ता (टूटी-फूटी) हो चुकी थी। जहांगीर बादशाह ने चार दर बढ़ा कर नयी बनवाई। शहनशाह औरंगजेब ने इसकी मरम्मत कराई, इस वजह से यह मस्जिद तीनों बादशाहों के नामों से मशहूर है।

उर्स शरीफ के दिनों में एक रजब से नौ रजब तक मजार अक्दस पर पेश करने के लिए सन्दल की घिसाई इसी मस्जिद में होती है जिसकी वहज से यह सन्दली मस्जिद के नाम से मशहूर हो गयी है।

हुजूर ख्वाजा गरीब नवाज र0अ0 के मजारे अक्दस से सुबह व शाम जो फूल उतरते हैं वह इसी मस्जिद के एक गहरे ताक में कुछ देर के लिए रखे जाते हैं इस वजह से इस मस्जिद को मस्जिद फूल खाना भी कहते हैं।

 

 

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